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घड़ी वाली लड़की के नाम से मशहूर है शीला मुर्मू, अपने हुनर से आदिवासी समाज का नाम किया रोशन

Sheela Murmu Success Story: दीवार पर लटकी घड़ी न सिर्फ इंसान को टाइम बताने का काम करती है, बल्कि उसे समय के साथ आगे बढ़ने का संदेश भी देती है। ऐसे में जरा सोचिए अगर इंसान के पास समय देखने के लिए घड़ी नहीं होती, तो वह अपने सारे काम समय पर कैसे पूरे कर पाता।

झारखंड की रहने वाली शीला मुर्मू (Sheela Murmu) को भी घड़ी और समय की अहमियत का एहसास था, लिहाजा उन्होंने घड़ी बनाने का काम शुरू कर दिया। शीला एक आदिवास समाज से ताल्लुक रखने वाली लड़की है, जिसने आज अपने हुनर और बुद्धिमानी के दम पर अपने समुदाय का नाम रोशन किया है।

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कौन है घड़ी वाली लड़की?

झारखंड (Jharkhand) के जमशेदपुर शहर से 60 किलोमीटर दूर स्थित नावाडीह नामक एक आदिवासी गांव से ताल्लुक रखने वाली शीला मुर्मू (Sheela Murmu) का जन्म एक किसान परिवार में हुआ था, जिसने 7वीं कक्षा से ही घड़ी बनाने का काम शुरू कर दिया था। दरअसल शीला ने गांव में मौजूद कस्तूरबा गांधी स्कूल में क्राफ्ट का काम सीखा था, जिसे आगे चलकर शीला ने व्यापार में तब्दील कर दिया।

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शीला मुर्मू (Sheela Murmu) लकड़ी पर खूबसूरत कलाकारी करके उसे घड़ी का रूप देती है, जिसे वह शहर में अच्छी कीमत पर बेच देती हैं। शीला अकेले इस काम को नहीं कर रही हैं, बल्कि उनके गांव की अन्य महिलाएं और पुरुष भी लकड़ी वाली घड़ी बनाना सीख रहे हैं ताकि उन्हें रोजगार प्राप्त हो सके।

नावाडीह गांव में कुल 70 संथाल परिवार रहते हैं, जो अपनी आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए खेती पर आश्रित हैं। लेकिन गांव में इतने खेत मौजूद नहीं है कि सभी परिवारों की जरूरतें पूरी हो सके, लिहाजा गांव के लोग लकड़ी की घड़ी बनाकर चंद पैसे कमाना चाहते हैं।

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रोजाना 5 से 7 घड़ी बनाती हैं शीला

शीला ने 7 साल की उम्र में स्कूल में लकड़ी से क्राफ्ट बनाना सीखा था, जिसके बाद उन्होंने घर पर छोटी मोटी चीजें बनाना शुरू कर दिया था। शीला मुर्मू घड़ी बनाने के लिए जूडी की लकड़ी का इस्तेमाल करती हैं, जिसके ऊपर वह कागज का डिजाइन चिपकाती हैं और फिर लकड़ी को उस डिजाइन में काटकर एक खूबसूरत कलाकृति तैयार कर लेती हैं।

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यह एक बहुत ही बारीकी भरा काम है, जिसमें काफी ज्यादा समय और मेहनत लगती है इसलिए बाजार में लकड़ी की एक घड़ी की कीमत 500 रुपए के आसपास है। शीला ने स्कूल से इस काम की शुरुआत की थी और आज वह कॉलेज में पढ़ाई कर रही हैं, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने घड़ी बनाने का काम भी जारी रखा है।

शीला इस काम में इतनी ज्यादा एक्सपर्ट हो गई हैं कि वह 1 दिन में 5 से 7 लकड़ी की घड़ी आराम से तैयार कर लेती हैं, जिन्हें वह बाजार में 500 से 600 रुपए की कीमत पर बेचती हैं। अपने इस हुनर के दम पर शीला हर महीने 30 हजार रुपए की कमाई कर लेती हैं, जबकि उनका घड़ी का कारोबार दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है।

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Shivani Bhandari
Shivani Bhandari
सपनों और हक़ीक़त को शब्दों से बयां करती है 'क़लम'!
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